IndiGo कभी भारतीय घरेलू एविएशन का “रीढ़ की हड्डी” हुआ करती थी। इसके पास लगभग 400‑450 विमानों का बेड़ा था, रोजाना ~2,200 उड़ानें, और हर महीने एक करोड़ से ज्यादा यात्री सफर करते थे। यात्रियों का भरोसा, बड़ी नेटवर्क, और व्यापक पहुँच — सभी कुछ था। लेकिन अब — उतनी ही बड़ी, उतनी ही विश्वसनीय — वही एयरलाइन, अपने इतिहास का सबसे बड़ा परिचालन संकट झेल रही है।
कब और कैसे बिगड़ी स्थिति नवंबर 2025 में, नए पायलट/क्रू ड्यूटी नियम (Flight Duty Time Limitations – FDTL) पूरी तरह लागू हुए। नए नियमों में पायलटों/क्रू के लिए ज़्यादा विश्राम अवकाश, रात की उड़ानों और लैंडिंग्स पर सख्त पाबंदी, और काम के घंटे सीमित करना शामिल था। लेकिन IndiGo ने उस बदलाव के लिए ज़रूरी पायलट / क्रू भर्ती, प्रशिक्षण, और शेड्यूलिंग प्रबंधन नहीं किया। कहा जाता है कि एयरलाइन ने “हायरिंग फ्रीज़” रखी थी — यानी नए स्टाफ नहीं जोड़े। इस कारण, उपलब्ध पायलट/क्रू की संख्या नई ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकी — विशेषकर रातों में उड़ानों और लैंडिंग्स की नई पाबंदियों के चलते।
संकट का परिणाम: उड़ान रद्दीकरण, देरी, यात्रियों के लिए आतंक नवंबर में ही, IndiGo ने 1,232 उड़ानें रद्द की — जिनमें से ~755 उड़ानें सिर्फ पायलट / क्रू और FDTL कारणों से थीं।
दिसंबर की शुरुआत में ही, एयरलाइन की “On‑Time Performance (OTP)” गिरकर 84.1% (अक्टूबर) → 67.7% (नवंबर) → फिर क्रमशः 35%, 19.7%, और 8.5% तक आ पहुँची।
2–4 दिसंबर 2025 के बीच, 200–300+ उड़ानें रोज़ रद्द हो रही थीं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स प्रभावित हुए। यात्रियों को घंटों इंतजार, कनेक्शन मिस, रात होने तक फंसे रहने, और कई जगह एयरपोर्ट पर बैचेन हालात का सामना करना पड़ा। एयरलाइन ने स्वीकार किया कि यह “क्रू शॉर्टेज, तकनीकी गड़बड़ी, मौसम, और एयरपोर्ट भीड़” — सबका मिलाजुला संकट है।
क्यों खासकर IndiGo — और अन्य एयरलाइंस प्रभावित क्यों नहीं? FDTL नियम जैसे ही लागू हुए, एयरलाइंस को 10–20% ज़्यादा क्रू या बेहतर शेड्यूलिंग की ज़रूरत थी। इंडिगो शायद अकेली थी जिसने तैयारी नहीं की — या किया भी हो, पर पर्याप्त नहीं।
इस बीच, IndiGo ने हाल तक “कुशल, कम‑खर्च, अधिक उड़ानें” का मॉडल अपनाया हुआ था — यानी “लेन स्टाफ + कम बफर” वर्कफ़ोर्स। जब नियम बदले, तो यही मॉडल टूट गया। कई पायलट reportedly छोड़कर जा चुके थे या अन्य एयरलाइंस की ओर रुख किया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह “संकट” केवल नियमों का नहीं, बल्कि “प्रबंधन गलती / रणनीतिक भूल” है: नए नियम आने से पहले ही कूच‑काज़ी करनी चाहिए थी।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह “प्रेरित” गड़बड़ी थी — ताकि एयरलाइन दबाव बना सके, लेकिन यह दावा अभी साबित नहीं है।
क्या सिर्फ Crew Shortage है — या कहानी कुछ और है? Crew shortage (पायलट / केबिन स्टाफ की कमी) महत्वपूर्ण है — लेकिन गड़बड़ी सिर्फ इससे नहीं थी: नई FDTL नियमों के अलावा, मौसम (सर्दियों में कोहरा), व्यस्त मौसम, एयरपोर्ट भीड़, तकनीकी घाट (जैसे चेक‑इन/रोज़गार प्रणाली में गड़बड़ियाँ), और विंटर शेड्यूलिंग बदलाव ने मिलकर हालात बिगाड़े।
लेकिन, मुख्य जिम्मेदारी इंडिगो की ही है — क्योंकि अन्य एयरलाइंस, जिनके पास कम उड़ानें थीं, उन्होंने उचित रूप से तैयारी की थी और उन्हें इस तरह का झटका नहीं लगा।
यदि क्रू की कमी को ही मुख्य वजह माना जाए, तो यह कहना गलत न होगा कि — “इतनी बड़ी एयरलाइन, इतना बड़ा बेड़ा, और नेटवर्क — फिर भी नियोजन की कमी ने सब कुछ धराशायी कर दिया।” नियामक कदम, प्रतिक्रिया और आगे क्या हुआ नियामक DGCA ने IndiGo को कारण बताओ नोटिस जारी किया, और स्थिति सुधारने के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
IndiGo ने कहा कि वो “क्रू प्लानिंग और रोस्टरिंग सुधार” पर काम कर रही है, और धीरे-धीरे शेड्यूल को पुनर्स्थापित करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी — लेकिन “एयरफेयर वृद्धि, शेड्यूल कटौती, और यात्रियों के लिए अस्थिरता” अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है।
IndiGo: कितनी बड़ी एयरलाइन थी – और कैसे हुई शुरुआत