‘संविधान की शक्ति ने एक साधारण व्यक्ति को पीएम पद तक पहुंचाया'

‘संविधान की शक्ति ने एक साधारण व्यक्ति को पीएम पद तक पहुंचाया'

देश आज राष्ट्रीय संविधान दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम एक विस्तृत और भावनात्मक पत्र लिखा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करें, क्योंकि यही एक मजबूत लोकतंत्र की वास्तविक नींव है। प्रधानमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा को याद करते हुए कहा कि भारत के संविधान ने ही उन्हें गरीब परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का रास्ता दिया। उनके अनुसार संविधान ने हर नागरिक को बराबरी का अवसर दिया है और यही भारतीय लोकतंत्र की बड़ी ताकत है।

“संविधान ने मुझे प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया”
पीएम मोदी पीएम मोदी ने पत्र में लिखा कि भारत का संविधान देश के विकास का मार्गदर्शक है और इसकी शक्ति ने एक सामान्य व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया। उन्होंने कहा-“भारत के संविधान की शक्ति ने मुझ जैसे गरीब परिवार से निकले साधारण व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचाया है। यह संविधान ही है जिसने मुझे 24 वर्षों तक सरकार के मुखिया के रूप में सेवा करने का अवसर दिया।”

उन्होंने संसद भवन से जुड़े अपने भावुक पलों को भी याद किया
2014: पहली बार संसद में प्रवेश करते हुए सीढ़ियों को नमन किया।
2019: चुनाव जीतने के बाद सेंट्रल हॉल में संविधान को सिर माथे लगाया।

मतदान अधिकार पर जोर — पहली बार वोट करने वाले युवाओं को सम्मानित करने का सुझाव प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मतदान का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को कभी भी मतदान के अवसर को छोड़ना नहीं चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल 26 नवंबर को स्कूल और कॉलेज पहली बार वोट करने वाले युवाओं का सम्मान करें। इससे युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी और गर्व की भावना बढ़ेगी। कर्तव्यों को सर्वोपरि रखने की सीख — गांधीजी को याद किया

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि-“अधिकार कर्तव्यों के पालन से उत्पन्न होते हैं।” उन्होंने कहा कि संविधान का आर्टिकल 51A, जो मौलिक कर्तव्यों पर आधारित है, सामाजिक और आर्थिक प्रगति का रास्ता दिखाता है। जब नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हैं, तभी देश तेजी से आगे बढ़ता है। संविधान निर्माताओं को नमन

प्रधानमंत्री ने संविधान दिवस पर संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि देते हुए कहा
उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. बी.आर. आंबेडकर, और संविधान सभा की अन्य प्रतिष्ठित महिला एवं पुरुष सदस्यों की भूमिका को याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने संविधान गौरव यात्रा निकाली थी, जिसमें संविधान की प्रतिकृति को हाथी पर रखकर पूरे राज्य में जनता तक पहुंचाया गया। संविधान के 75 वर्ष — विशेष अभियान और संसद का विशेष सत्र |प्रधानमंत्री ने बताया कि जब संविधान के 75 वर्ष पूरे हुए, तब पूरे देश में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया और संसद का विशेष सत्र आयोजित किया गया। यह अभियान बड़ी जनभागीदारी और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक बना।

क्यों विशेष है यह संविधान दिवस?

प्रधानमंत्री के अनुसार, इस वर्ष संविधान दिवस कई कारणों से ऐतिहासिक है—
सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती सरदार पटेल के कारण देश का राजनीतिक एकीकरण संभव हुआ। उनकी प्रेरणा से ही जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाया गया, जिससे वहां संविधान पूरी तरह लागू हुआ| वंदे मातरम् के 150 वर्ष यह गीत हर दौर में भारतीयों में देशभक्ति और सामूहिक संकल्प की भावना जगाता रहा है।

गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ उन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया, जो आज भी प्रेरणा देता है।
2047 और 2049 के लक्ष्य — ‘आज के फैसले आने वाली पीढ़ियों को आकार देंगे’ प्रधानमंत्री मोदी ने देश के भविष्य पर जोर देते हुए कहा कि
2047: भारत की आजादी के 100 वर्ष,2049: संविधान निर्माण के 100 वर्ष

आज हम जो नीतियां बनाएंगे, वे आने वाली पीढ़ियों के जीवन को प्रभावित करेंगी। इसलिए विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्तव्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है। अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें — पीएम का राष्ट्र से आह्वान |उन्होंने देशवासियों से कहा-“देश ने हमें बहुत कुछ दिया है। हमें कृतज्ञता की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। हमारा हर कार्य संविधान की शक्ति बढ़ाने वाला होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जब नागरिक कर्तव्य को जीवन का स्वभाव बना लेते हैं, तब सामाजिक और आर्थिक प्रगति कई गुना बढ़ जाती है।

युवा मतदाताओं के लिए विशेष संदेश प्रधानमंत्री ने युवाओं से विशेष रूप से कहा कि वे मतदान अधिकार का पूर्ण उपयोग करें।
उन्होंने फिर दोहराया कि— स्कूलों और कॉलेजों में हर साल 26 नवंबर को पहली बार वोट करने वालों का विशेष सम्मान होना चाहिए। इससे युवाओं में लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति आजीवन समर्पण पैदा होगा, जो एक मजबूत राष्ट्र की नींव है।

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