छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश सीमा पर मंगलवार सुबह हुए भीषण मुठभेड़ ने नक्सल मोर्चे की पूरी तस्वीर बदल दी है। बस्तर क्षेत्र का सबसे खूंखार और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा आखिरकार मारा गया। उसके साथ उसकी पत्नी राजे उर्फ रजक्का और अन्य नक्सली भी ढेर हो गए। यह अभियान नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
सुबह-सुबह जंगल में चला घमासान
यह मुठभेड़ सुबह 6 से 7 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के मारेदुमिल्ली इलाके में हुई। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी के बाद जंगलों में एक विशेष कार्रवाई की योजना बनाई थी। जैसे ही टीम नक्सल कैंप के करीब पहुंची, दोनों ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई।
लगभग एक घंटे चली इस मुठभेड़ में हिडमा, उसकी पत्नी रजक्का, और कुल छह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की जा रही है। कई हथियार और गोला-बारूद भी मौके से बरामद किए गए।हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन कई स्रोतों ने स्पष्ट किया है कि मारे गए नक्सलियों में हिडमा भी शामिल था।
कौन था हिडमा? जंगल का सबसे खतरनाक चेहरा
हिडमा को बस्तर का सबसे खूंखार माओवादी कमांडर माना जाता था।
उसके सिर पर ₹1 करोड़ का इनाम था।वह नक्सलियों की सबसे घातक लड़ाकू टुकड़ी का प्रमुख था।
बुरकापाल हमले, ताड़मेटला नरसंहार जैसे कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड वही था।
जंगलों में उसकी पकड़ और गुरिल्ला रणनीति की वजह से वह वर्षों तक पकड़ा नहीं जा सका।
इसलिए उसका मारा जाना नक्सल नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुठभेड़ के बाद मिला अभियान की सबसे बड़ी सफलता
सुरक्षा बलों के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ की सफलता वर्षों की खोजबीन और लगातार निगरानी का परिणाम है। हिडमा जिस इलाके में छिपा था, वह बेहद घना जंगल और दुर्गम रास्तों से घिरा है, जहाँ नक्सलियों का प्रभाव काफी मजबूत था।
गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया
हिडमा के मारे जाने की खबर आने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।इस बैठक का उद्देश्य थानक्सल संगठन में किसी नए नेतृत्व को उभरने से रोकना दक्षिण बस्तर और बॉर्डर क्षेत्रों में नक्सली संरचना को पूरी तरह ध्वस्त करने की रणनीति बनाना आगे की कार्रवाई को और तेज करना
अमित शाह ने इस ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए कहा कि यह नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
नक्सल मोर्चे पर बड़ा मोड़
हिडमा की मौत नक्सली संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि वह जमीनी स्तर पर नक्सलियों को संगठित करने और हमलों को अंजाम देने में सबसे सक्षम माना जाता था।
सूत्रों का कहना है कि कई वर्षों से चल रहे अभियान की यह सबसे बड़ी सफलता है और इससे नक्सलियों का मनोबल टूटेगा।
निष्कर्ष: जंगल में खामोशी, पर खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं
हिडमा के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन की संरचना कमजोर जरूर हुई है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में नक्सलियों की गतिविधि जारी है। सुरक्षा बल अब इसी मौके का फायदा उठाकर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में हैं।
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