नागौर, राजस्थान: एक समय था जब मोबाइल का कैमरा ऑन करके वीडियो बनाने पर लोग उपहास करते थे, लेकिन आज उन्हीं लोगों को कविराज धोलिया के नए वीडियो का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। नागौर जिले के वीर तेजाजी की जन्मस्थली खरनाल के निवासी राजेंद्र धोलिया, जिन्हें आज 'कविराज' के नाम से जाना जाता है, ने अपनी देसी कॉमेडी, पारिवारिक वीडियो और समाज सेवा के बल पर सोशल मीडिया की दुनिया में एक ऐसी पहचान बनाई है जो अब पूरे राजस्थान में गूंज रही है।
मिट्टी की खुशबू और पारिवारिक जुड़ाव
कविराज के वीडियो की सबसे बड़ी खासियत है उनकी 'गांव की मिट्टी की महक', पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट और देसी ठहाकों का बेजोड़ तड़का। उनके फॉलोअर्स का मानना है कि उनकी रील्स में 'रोजमर्रा की जिंदगी' का सच्चा रंग झलकता है।
वायरल कंटेंट: माँ, बहन और भांजे के साथ फिल्माए गए उनके वीडियो विशेष रूप से वायरल हुए हैं
विशुद्ध हास्य: आज उनके इंस्टाग्राम, फेसबुक और यू-ट्यूब पर साढ़े 3 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। खास बात यह है कि उन्होंने कभी किसी गेम या भ्रामक ऐप का प्रमोशन नहीं किया, हमेशा शुद्ध हास्य को प्राथमिकता दी है।
सफलता का मंत्र: कविराज का मानना है, "जो कंटेंट परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके, वही असली सफलता है।"
कॉमेडी से समाज सेवा तक: एक नेक सफर
कविराज का योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है; वे समाज सेवा के क्षेत्र में भी दिल से जुड़े हुए हैं।
गौ सेवा: उन्होंने सैकड़ों गायों को भोजन, उपचार और आश्रय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रक्तदान महादान: ब्लड डोनर ऐप के माध्यम से वे अब तक 15 हजार लोगों तक रक्त पहुंचाने में मदद कर चुके हैं।
सहयोग: इस नेक कार्य में विकास धोलिया, रामपाल खोजा, सुरेंद्र सांगवा और चंद्रशेखर जैसे साथियों का उन्हें निरंतर सहयोग मिला है।
संघर्ष की कहानी: सरकारी नौकरी से स्टारडम तक
कविराज का वास्तविक नाम राजेंद्र धोलिया है। उन्हें 'कविराज' की उपाधि जयेश सांखला ने दी, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी राह खोजी।
शुरुआती संघर्ष: एम.कॉम और बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी के प्रयास असफल रहे। लेकिन, राजस्थानी भाषा को मंच देने का अभिनय का शौक बचपन से था।
दृढ़ संकल्प: तीन साल तक परिवार के विरोध के बावजूद वह वीडियो बनाते रहे। आज उनके पिता उनके सबसे बड़े समर्थक हैं।
लक्ष्य: कविराज कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि मेरी हंसी लोगों के मन को जोड़ने का जरिया बने और मेरा काम समाज को सेवा का रास्ता दिखाए।"
कविराज धोलिया की यह कहानी दिखाती है कि समर्पण और सही दिशा में मेहनत से, लोग निश्चित रूप से उस पहचान को हासिल कर सकते हैं जिसका सपना वे देखते हैं।
हँसी से सफलता तक: जिस कैमरे पर हँसे, उसी ने बनाया 'कविराज' को स्टार!