झालावाड़ में स्कूल की छत ढहने से भीषण हादसा – सात मासूम छात्रों की मौत; प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

झालावाड़ में स्कूल की छत ढहने से भीषण हादसा – सात मासूम छात्रों की मौत; प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

झालावाड़, राजस्थान: 25 जुलाई 2025 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गाँव में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत की छत गिरने से सात मासूम छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई और कम से कम 17 बच्चे घायल हुए हैं। यह हादसा सरकारी स्कूलों की इमारतों के रखरखाव में बरती गई घोर लापरवाही को उजागर करता है।

घटना का विस्तृत विवरण
समय और स्थान
स्थान: राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पिपलोदी गाँव, मनोहरथाना, झालावाड़।

तिथि: 25 जुलाई 2025 (शुक्रवार)।

समय: सुबह लगभग 10:00 बजे, जब कक्षाएँ शुरू हो चुकी थीं।

हादसे की भयावहता
घटना उस समय हुई जब कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थी अपनी कक्षा में मौजूद थे। गाँव में हो रही हल्की बारिश के बीच, स्कूल भवन की पुरानी और सीलन भरी छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक और तेज़ी से भरभरा कर नीचे गिर गया। छात्र, उनके बस्ते और किताबें मलबे के नीचे दब गए।

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद चारों ओर चीख-पुकार मच गई। आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण और स्थानीय निवासी तुरंत मौके पर पहुँचे और बचाव कार्य शुरू किया। गाँव में एंबुलेंस की अनुपलब्धता या देर से पहुँचने के कारण, ग्रामीणों ने घायल और मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए फावड़े और खुरपी का इस्तेमाल किया।

कई गंभीर रूप से घायल बच्चों को तुरंत ट्रैक्टरों में लादकर मनोहरथाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CSC) ले जाया गया। अस्पताल में प्रारंभिक इलाज के दौरान सात बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल 10 बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

मृतकों की पहचान
इस त्रासदी में जान गंवाने वाले सात छात्रों की पहचान कर ली गई है, जिनमें दलित और आदिवासी समुदाय के बच्चे शामिल हैं। ये सभी 6 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के थे:

अर्जुन मीणा (12)

कविता बैरवा (13)

गोलू सेन (11)

पिंकी मीणा (12)

रोहित बंजारा (13)

निकिता धाकड़ (11)

रमेश प्रजापत (14)

प्रशासनिक विफलता और लापरवाही के आरोप
यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की घोर लापरवाही और अनदेखी का परिणाम बताया जा रहा है।

चेतावनी को नज़रअंदाज़: सूत्रों और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, राजस्थान शिक्षा विभाग ने मानसून के आगमन से पहले 14 जुलाई 2025 को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को एक स्पष्ट निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में राज्य के सभी पुराने और जर्जर स्कूल भवनों की सुरक्षा जाँच करने और आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था।

झालावाड़ प्रशासन की निष्क्रियता: आरोप है कि झालावाड़ जिला प्रशासन और स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं दिया। पिपलोदी स्कूल की इमारत लंबे समय से जर्जर स्थिति में थी और लगातार हो रही बारिश से इसकी स्थिति और भी खराब हो गई थी।

शिक्षकों पर आरोप: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि हादसे से कुछ देर पहले बच्चों ने छत से सीमेंट गिरने की शिकायत की थी, लेकिन शिक्षकों ने उन्हें धमकाकर वापस बैठा दिया।

सरकारी कार्रवाई और जन आक्रोश
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और तत्काल जांच के आदेश दिए।

सस्पेंशन: शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिपलोदी स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, एक शिक्षा विभाग के अधिकारी को भी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया है।

मुआवजे की घोषणा: राज्य सरकार ने मृतक छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। साथ ही, कुछ परिवारों को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है।

मंत्री का बयान: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने झालावाड़ पहुँचकर अस्पताल में भर्ती बच्चों से मुलाकात की और सार्वजनिक रूप से इस त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी ली।

दुर्घटनास्थल पर स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का भारी प्रदर्शन देखा गया, जिन्होंने मुआवजे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और प्रारंभिक शिक्षा विभाग, कलेक्टर, एसपी तथा जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

निष्कर्ष
पिपलोदी गाँव की यह त्रासदी राजस्थान में सरकारी शिक्षा के बुनियादी ढांचे की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। यह घटना दर्शाती है कि जब तक प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती और निर्देशों का पालन समय पर नहीं होता, तब तक मासूम छात्रों का जीवन खतरे में रहेगा। यह समय है कि सरकारें सिर्फ जाँच और मुआवजे तक सीमित न रहें, बल्कि देशभर के जर्जर स्कूलों की तत्काल मरम्मत के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाएँ।

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