छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन: एक ढोंगी संत से लेकर देशविरोधी षड्यंत्रकर्ता तक की सच्ची कहानी

छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन: एक ढोंगी संत से लेकर देशविरोधी षड्यंत्रकर्ता तक की सच्ची कहानी

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सामने आई यह चौंकाने वाली कहानी केवल एक नकली बाबा की नहीं, बल्कि एक खतरनाक धर्मांतरण नेटवर्क के मास्टरमाइंड की है। छांगुर बाबा, जिसका असली नाम जमालुद्दीन है, एक ऐसा व्यक्ति था जिसने हिंदू संत का रूप धारण कर समाज के मासूम लोगों को धोखे में रखा। उसका उद्देश्य न तो अध्यात्म था और न ही भक्ति, बल्कि वह एक सुनियोजित और अंतरराष्ट्रीय एजेंडे के तहत भारत में धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाला कट्टरपंथी एजेंट था

उसने भगवा वस्त्र पहनकर, माथे पर तिलक लगाकर, और पूजा-पाठ के कार्यक्रम करके खुद को एक “सच्चा बाबा” सिद्ध किया, जिससे हिंदू समाज का विश्वास जीत सके — खासकर महिलाओं और लड़कियों का, जो उसकी सबसे बड़ी टारगेट थीं।

बाबा बनने की चाल और लोगों को फंसाने का तरीका
जमालुद्दीन ने "छांगुर बाबा" का नाम रखकर बलरामपुर में एक आश्रम जैसी जगह बनाई। वहां वह रोज़ाना पूजा-पाठ, कीर्तन, कथा, और हवन करवाता था ताकि माहौल एक आध्यात्मिक जगह जैसा लगे। उसकी भाषा, पहनावा और शैली एक असली हिंदू संत जैसी थी। उसका मुख्य उद्देश्य था – लोगों को विश्वास में लेकर धीरे-धीरे उन्हें धर्मांतरण की दिशा में मोड़ना।

आश्रम में आने वाली अधिकतर महिलाएं और युवतियां अपनी निजी समस्याओं को लेकर बाबा के पास जाती थीं – कोई संतान की इच्छा लिए आती, कोई पति से परेशान होकर, तो कोई मानसिक शांति की तलाश में। छांगुर बाबा उन महिलाओं की "मन की बात" जान लेने का दावा करता और झूठे चमत्कार दिखाकर उनका भरोसा जीतता। धीरे-धीरे वह भावनात्मक लगाव बनाता, और फिर उन्हें अपने जाल में फंसा लेता।

धोखे से प्रेम जाल और ब्लैकमेलिंग की खौफनाक रणनीति
बाबा उन महिलाओं से कहता, “तुम्हारा पति तुम्हारे लायक नहीं”, या “तुम मेरी पूर्व जन्म की अर्धांगिनी हो”, और फिर उन्हें “ईश्वरीय आदेश” का हवाला देकर प्रेम, विवाह और आत्मा के बंधन जैसी बातें करता। जब महिलाएं भावनात्मक रूप से जुड़ जातीं, तो वह “तपस्या” के बहाने उन्हें अकेले कमरे में बुलाने लगता। वहां पर छुपे कैमरे लगे होते थे, जिनसे वह उनके वीडियो और फोटो बनवाता।

इसके बाद, यदि कोई महिला पीछे हटती या सच्चाई जान जाती, तो वह उन्हीं तस्वीरों से उसे ब्लैकमेल करता — “अगर तुमने कुछ कहा या मेरा कहा नहीं माना तो तुम्हारा नाम बदनाम कर दूंगा, वीडियो वायरल कर दूंगा।” इस तरह उसने कई महिलाओं को डराकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में उनसे जबरन धर्म परिवर्तन करवाया।

धर्मांतरण के बाद ‘फाइलिंग सिस्टम’ और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग नेटवर्क
बाबा ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रखा था, जो किसी सॉफ्टवेयर सिस्टम से कम नहीं था। हर पीड़िता की एक फाइल बनती थी — जिसमें उसका नाम, जाति, फोटो, धर्म परिवर्तन की स्थिति, नया नाम और लोकेशन शामिल होता था। ये फाइलें वह विदेशी फंडिंग नेटवर्क को भेजता था, जहां से उसे हर केस के बदले मोटी रकम मिलती थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राह्मण या ठाकुर लड़की के धर्म परिवर्तन के बदले ₹15–16 लाख, पिछड़ी जातियों की लड़की के बदले ₹10–12 लाख और दलित वर्ग की लड़की के बदले ₹8–10 लाख तक की फंडिंग आती थी। इसके अलावा, कई लड़कियों को मुस्लिम देशों में शादी के बाद भेजा जाता था, जिसके बदले ₹2–3 लाख अलग से मिलते थे।

कहां से आता था पैसा और कैसे चलता था विदेशी नेटवर्क?
छांगुर बाबा को फंडिंग सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, तुर्की और UK जैसे देशों से मिलती थी। पैसा कई रास्तों से आता — जैसे हवाला, फर्जी NGOs के बैंक खातों, या फिर क्रिप्टोकरेंसी। बाबा के पास 40 से ज्यादा बैंक अकाउंट थे, जिनमें हर महीने ₹5–25 लाख तक की विदेशी फंडिंग आती थी।

वह इन पैसों को समाज सेवा के नाम पर दिखाता था लेकिन असल में यह पैसा धर्मांतरण माफिया ऑपरेशन के लिए खर्च होता था। उसने “Humanity Welfare Trust”, “Peace Conversion Mission” और “Green World for All” जैसे नामों से फर्जी NGOs बनवा रखे थे जो गरीबों की मदद, महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बहानों के जरिए वैध चंदा दिखाते थे।

सोशल मीडिया का जहर: युवाओं को निशाना बनाने का डिजिटल तरीका
बाबा और उसके सहयोगी सोशल मीडिया पर फर्जी नामों से अकाउंट चलाते थे — खासकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर। इन अकाउंट्स का उपयोग लड़कियों को फंसाने, कट्टरपंथी विचारों के प्रचार और धर्म परिवर्तन के प्रचार के लिए होता था।

धर्मांतरण के बाद, लड़की की नई मुस्लिम पहचान वाली फोटो वायरल की जाती और उस पर संदेश लिखा होता — “1 ब्राह्मण लड़की इस्लाम कबूल कर चुकी है, दुआ में याद रखना और मदद करो।” इससे विदेशी संगठनों से आर्थिक मदद और समर्थन मिलता था।

ATS की जांच और गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब कुछ लड़कियों के परिजनों ने ATS को शिकायत दी कि उनकी बेटियां बाबा के आश्रम गई थीं, और अब ना ही वापस आई हैं, ना ही उनकी पुरानी पहचान बाकी है। ATS ने गुप्त निगरानी शुरू की — जिसमें बाबा की मोबाइल लोकेशन, बैंक ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया गतिविधियों, क्रिप्टो वॉलेट्स और विदेशी नंबरों से बातचीत पर नजर रखी गई।

जांच में पाया गया कि बाबा के संपर्क पाकिस्तान और गल्फ देशों तक फैले हुए हैं। ATS ने 1 महीने की निगरानी के बाद धर्मांतरण फॉर्म्स, पीड़ित लड़कियों की लिस्ट, विदेशी खातों की डिटेल्स और ₹100 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग के सबूत इकट्ठे कर लिए।

5 जुलाई 2025 को बाबा के गढ़ पर छापा और गिरफ्तारी
5 जुलाई 2025 की सुबह ATS ने बलरामपुर स्थित बाबा के आश्रम पर छापा मारा। वहां से ₹15 लाख कैश, 8 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 50 से ज्यादा धर्मांतरण फॉर्म्स और महिलाओं की फाइलें बरामद की गईं।

बाबा को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसके 5 सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया — जिनमें एक मौलवी, एक NGO ऑपरेटर और फंडिंग मैनेजर शामिल हैं। कुल 12 लोगों पर FIR दर्ज हुई। बाबा पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467/468 (फर्जी दस्तावेज), FCRA अधिनियम (बिना अनुमति विदेश से फंडिंग), मनी लॉन्ड्रिंग और U.P. धर्मांतरण निषेध अधिनियम 2021 के तहत मुकदमे दर्ज हुए हैं। इसके अलावा, मामले की गंभीरता देखते हुए अब NIA और ED भी इस जांच में शामिल हो गई हैं।

अब क्या हो रहा है?
छांगुर बाबा इस समय न्यायिक हिरासत में है। उसके सारे बैंक खातों को सीज़ कर दिया गया है, उसकी संपत्ति को जब्त कर लिया गया है, और उसके बलरामपुर स्थित आश्रम को सील कर दिया गया है। ED और NIA की टीमें उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य बाबाओं, मौलवियों और NGOs की जांच कर रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे भारत में फैले एक धर्मांतरण नेटवर्क का सिर्फ एक हिस्सा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथी ताकतों का समर्थन प्राप्त है।

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